
भुवनेश्वर: भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी में स्थित ऐतिहासिक गुंडिचा (मौसीमाँ) मंदिर को 1 दिसंबर से श्रद्धालुओं के लिए खोलने की योजना को श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह निर्णय वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत उन रिपोर्टों के बाद लिया गया, जिनमें मंदिर परिसर में चल रहे आवश्यक मरम्मत, संरक्षण एवं सुरक्षा-संबंधी कार्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता बताई गई है।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति की अनुशंसा पर कुछ दिन पहले गुंडिचा मंदिर का विस्तृत निरीक्षण किया गया था। इसके बाद एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढी ने घोषणा की थी कि मंदिर को 1 दिसंबर से श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। चूंकि संरचनात्मक कारणों और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों के चलते यह मंदिर लगभग छह वर्षों से आम जनता के लिए बंद था, इसलिए इसे खोलने को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।
हालांकि, निरीक्षण के बाद प्राप्त ताज़ा रिपोर्टों ने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। अतिरिक्त मुख्य अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में अब भी कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक और संरक्षण-संबंधी कार्य अधूरे हैं। इनमें इस्पात बीम (स्टील बीम) की स्थापना और खोंडालाइट पत्थरों से नई फ़र्श बिछाने का काम शामिल है। ये दोनों कार्य मंदिर की सुरक्षा और स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित कार्य सुनिश्चित करने के लिए और समय आवश्यक है। इसी प्रकार, सीनियर सुपरवाइज़र ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मंदिर के उद्यान क्षेत्र और आसपास के परिसर में तुरंत सफाई, सौंदर्यीकरण और विकास कार्य करवाने की आवश्यकता है।
मंदिर खुलने पर श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। इन सभी तकनीकी और संरचनात्मक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एसजेटीए ने फिलहाल गुंडिचा मंदिर के पुनः खुलने की योजना को टालने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने कहा कि सभी आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव कार्य संतोषजनक स्तर पर पूर्ण होने के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए नई तारीख घोषित की जाएगी। गुंडिचा मंदिर पुरी की प्रसिद्ध रथयात्रा परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां भगवाना बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा प्रतिवर्ष आकर ठहरती है। इसी महत्व के कारण छह वर्षों से बंद रहने के बावजूद मंदिर को खोले जाने को लेकर स्थानीय लोग तथा श्रद्धालु उत्सुक थे।
श्री जगन्नाथ मंदिर के लिए ₹17.12 करोड़ का धरोहर प्रकाश सज्जा का प्रस्ताव इसी बीच एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने 12वीं शताब्दी में निर्मित विश्वप्रसिद्ध पुरी जगन्नाथ मंदिर के लिए अत्याधुनिक धरोहर प्रकाश सज्जापरियोजना प्रस्तावित की है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद मंदिर की भव्यता रात्रि में और अधिक निखरकर सामने आएगी, तथा मंदिर लगभग 10 किलोमीटर दूर से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढी ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर पूरा कर लिया है।
परियोजना के प्रथम चरण की अनुमानित लागत ₹17.12 करोड़ है, जिसमें कार्य पूर्ण होने के बाद पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की लागत भी शामिल है। एसजेटीए इस परियोजना को निधि प्रदान करने हेतु इसे राज्य सरकार के अबढा योजना (ABADHA Scheme) के अंतर्गत प्रस्तावित करेगा। पाढी ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य मंदिर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्यीय विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीक की सहायता से एक आकर्षक एवं उन्नत प्रकाश व्यवस्था स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि परियोजना पर सभी उप-समितियों ने विस्तृत चर्चा की और इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी। साथ ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार उचित प्रबंधन और क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
धरोहर प्रकाश सज्जा परियोजना में गरभागृह, जगमोहन, नाटमंडप और भोगमंडप को छोड़कर मंदिर परिसर के लगभग सभी हिस्सों—जैसे पार्श्व देवताओं के मंदिर, आनंद बाजार, मेघनाद पचेरी (वृहद् बाहरी प्राचीर), कुरुमा बेढा और अन्य संरचनाएं—प्रकाशमान की जाएंगी। अधिकारी ने बताया कि यह आधुनिक तकनीक-आधारित प्रकाश व्यवस्था मंदिर की रात्रिकालीन सुंदरता को कई गुना बढ़ा देगी तथा संपूर्ण परिसर का दृश्य अनुभव अत्यंत मनोहारी होगा। फोटो कैप्सन – पुरी के श्रीगुंडिचा मंदिर