देवभूमि उत्तराखंड में अवैध मस्जिदों और ऊंची मीनारों का षड्यंत्र: हरिद्वार-देहरादून में बढ़ते इस्लामिक प्रतीक चिन्ह

VSK Telangana    16-Dec-2025
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देवभूमि उत्तराखंड

देहरादून: उत्तराखंड को सनातन संस्कृति की राजधानी माना जाता है देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में ऊंची मीनारों वाली मस्जिदें बनाए जाने का षडयंत्र रचा गया है, पिछले पंद्रह सालों में ये सिलसिला शुरू हुआ जो अबतक जारी है। खास बात ये है कि ये ऊंची मीनारें बिना प्रशासन और प्राधिकरण की अनुमति के बन रही है। इन धार्मिक संरचनाओं में नियमों को ताक में रख दिया गया है।

पिछले दिनों सनातन के प्रतीक माने जाते हरिद्वार जिले के सुल्तानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बनाए जाने और उसकी मीनार की ऊंचाई को लेकर खबरें सुर्खियों में रही। हरिद्वार जिला प्रशासन ने इसका निर्माण कार्य रोकते हुए नोटिस जारी किया था। बताया जाता है कि नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला यानि स्पष्ट है कि उक्त मस्जिद बिना किसी सरकारी अनुमति के बनाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट का 2009 और 2016 का ऐसा निर्देश है कि कोई भी धार्मिक भवन या संरचना बिना जिला अधिकारी के अनुमति के नहीं बनाई जा सकती। इसके पीछे तर्क यही था कि एक तो धार्मिक संरचना, सरकारी भूमि पर न बने और इसके निर्माण में सुरक्षा के हर पहलू का ध्यान रखा जाए।

छोटी सी मस्जिद ने विशाल क्षेत्र घेरा

इसी तरह नैनीताल में आलीशान मस्जिद परिसर को धीरे-धीरे बड़ा आकार दे दिया गया। जब उत्तराखंड राज्य बना तो ये छोटी से मस्जिद थी और इसके बाद 2004- 05 में तिवारी सरकार और फिर हरीश रावत सरकार में इसकी ऊंची मीनार और बड़ा परिसर बन कर तैयार हुआ। आज ये मस्जिद कहीं न कहीं यातायात में बाधक प्रतीत होने लगी है। पछुवा दून में रामपुर मंडी सेलाकुई की आलीशान मस्जिद को लेकर भी सवाल उठे थे कि इसने कैसे इतना विशाल और भव्य रूप लिया इसे कहां से इतना फंड मिला ? इसके निर्माण को लेकर कोई प्रशासनिक अनुमति मिली थी या नहीं ?

उत्तराखंड में 722 से अधिक मस्जिद

सहसपुर में जमीयत उलूम मदरसा और मस्जिद को लेकर खासी चर्चा हुई जहां गगनचुंबी पानी की टंकी बना कर उस पर लाउडस्पीकर लगा दिया गया था। उक्त मदरसे की एक मंजिल जिला प्रशासन ने सील की थी क्योंकि वो बिना अनुमति के बना दी गई थी।
ऐसे ही हरिद्वार जिला में भी कई स्थानों पर मदरसा मस्जिद बनाई गई है। उत्तराखंड में 722 से अधिक मस्जिदों का निर्माण हो चुका है जिसका आंकड़ा उत्तराखंड सरकार के पास भी है। इनमें सबसे ज्यादा मस्जिदें सनातन गंगा नगरी हरिद्वार जिले में है जिनके संख्या 322 बताई गई है। देहरादून जिले में 155, उधम सिंह नगर में 144 और नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें है।खास बात ये कि इनमें से शायद ही कोई ऐसी हो जिसमें भव्यता का निर्माण कार्य न चल रहा हो।

खास बात ये भी है कि कुछ चिन्हित स्थानों पर मस्जिदों ने भव्यता के साथ साथ बड़ा आकार लेना भी शुरू कर दिया है मानो यहां कोई कंप्टीशन चल रहा हो कि कौन सबसे ऊंची मीनार बनाएगा या कौन सबसे बड़ी मस्जिद बनाएगा। गौर करने वाली बात ये कि इनमें कोई भी निर्माण संबंधी अनुमति नहीं ले रहा, कारण ये है कि प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करने के लिए उन्हें भूमि, संस्था पंजीकरण,आय व्यय का ब्यौरा और अन्य दस्तावेज दिखाने पड़ते है जोकि बहुत से मस्जिद प्रबंधकों के पास नहीं होते। कई इमारतें ऐसी है जोकि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे करके बनाई गई है और फिर उन्हें वक्फ बोर्ड में पंजीकृत करवा दिया गया,इसका नतीजा ये हुआ कि प्रशासन इनके खिलाफ कार्रवाई करने से परहेज करता रहा।

पिछले दिनों वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करवाने के दौरान भी ऐसे ही पेच उलझे हुए दिखाई दिए हैं। बहरहाल सनातन देवो की भूमि उत्तराखंड में इस्लामिक प्रतीक चिन्हों की बढ़ती बसावट से स्थानीय सनातन भी चिंतित है।