
लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडरों में से एक अब्दुल रऊफ (हाफिज अब्दुल रऊफ) ने मुरीदके में नए ट्रेनी आतंकियों को संबोधित करते हुए जो बात कही, वो लश्कर के लिए बड़ा झटका है। आमतौर पर ऐसे संगठन अपनी कमजोरी कभी नहीं दिखाते, लेकिन रऊफ ने साफ-साफ स्वीकार किया कि भारतीय हमलों ने उनके मुख्य ठिकाने को पूरी तरह तबाह कर दिया।
उन्होंने कहा, “6-7 मई को जो हुआ, उसके बाद वह जगह अब मस्जिद नहीं रही। आज हम वहां बैठ भी नहीं सकते। वह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वह ढह गई है।” ये बयान एक वीडियो में आया है, जिसमें रऊफ नए लड़ाकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ये भी बताया कि हमले से ठीक पहले ट्रेनिंग में मौजूद लोगों को कैंप से बाहर निकाल लिया गया था। इससे साफ होता है कि भारतीय खुफिया एजेंसियों और सेना के पास बहुत सटीक जानकारी थी, और हमला इतना तेज था कि लश्कर वाले संभल भी नहीं पाए।
लश्कर का हब है मुरीदकेमुरीदके लश्कर का सबसे महत्वपूर्ण ‘हब’ था। यहां ट्रेनिंग होती थी, कमांडर प्लान बनाते थे और आतंकी तैयार किए जाते थे। 26/11 मुंबई हमले जैसे कई बड़े प्लान यहीं से निकले थे। ऑपरेशन सिंदूर में 6-7 मई की रात को भारतीय मिसाइलों और स्ट्राइक्स ने इस जगह को नेस्तनाबूद कर दिया। रऊफ ने इसे “बहुत बड़ा हमला” बताया और कहा कि जगह अब बैठने लायक भी नहीं बची। पहले भी हमले में मारे गए आतंकियों के जनाजे की तस्वीरें आई थीं, जिनमें रऊफ खुद शामिल थे। लेकिन अब उनके मुंह से ये कबूलनामा आया है कि मुख्यालय और ट्रेनिंग सेंटर पूरी तरह बर्बाद हो गया।
ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद शुरू हुआ। उस हमले की जिम्मेदारी लश्कर के शाखा द रजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी। भारत ने जवाब में पाकिस्तान में 9 बड़े आतंकी कैंपों को टारगेट किया, जिसमें मुरीदके के अलावा बहावलपुर (जैश का मुख्यालय) भी था। सेना के मुताबिक कई हाई-वैल्यू आतंकी मारे गए, और आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा। रऊफ जैसे कमांडर का ये खुलासा दिखाता है कि हमले की सटीकता और असर कितना गहरा था। लश्कर अब तक नुकसान छिपाने की कोशिश करता रहा, लेकिन अब उनके अपने आदमी ने सच बता दिया।
(Courtesy: Panchjanya)