
नई दिल्ली। डीएमके के नेता अक्सर हिंदू धर्म और देवी-देवताओं पर विवादित टिप्पणी करते हैं। अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पोंगल को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसको लेकर कहा जा रहा है कि वह इस त्यौहार को हिंदू धर्म से अलग करना चाहते हैं। वहीं डीएमके के सांसद दयानिधि मारन ने महिलाओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की है। उन्होंने उत्तर भारत और दक्षिण भारत की महिलाओं को बांटने की कोशिश की। भाजपा और एआईएडीएमके ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
तमिलनाडु में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले ही डीएमके के नेता वोट बैंक के लिए विभाजनकारी रवैये पर उतर आए हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे द्रविड़ियन पोंगल मनाएं। यह तमिल समाज का फसल उत्सव है। यह किसी धर्म या जाति तक सीमित नहीं है। पोंगल की जड़ें तमिल संस्कृति में हैं न कि किसी धार्मिक पहचान में। उन्होंने कम्युनिस्टी पोंगल कार्यक्रम करने को कहा।
स्टालिन के इस बयान का कड़ा विरोध हुआ है। भाजपा और एआईएडीएमके ने कहा कि डीएमके पोंगल की पहचान बदलने की कोशिश कर रही है। हिंदू धार्मिक तत्व हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, डीएमके के सांसद दयानिधि मारन ने तो हद ही कर दी। उन्होंने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ने के लिए कहा जाता है, जबकि उत्तर भारत में लड़कियों से कहा जाता है कि वे घर पर रहें, खाना बनाएं और बच्चे पैदा करें। उनके इस शर्मनाक बयान की भाजपा ने कड़ी निंदा की। मारन से मांग की कि वे हिंदीभाषियों से माफी मांगें।