
पराग अभ्यंकर शनिवार को यहां शिवपुर कोइराजपुर स्थित संत अतुलानंद कांवेंट स्कूल में आयोजित राष्ट्रीय सेवा भारती के स्वावलंबन एवं वैभव श्री प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रशिक्षुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संघ की प्रतिज्ञा में लिखा है कि अपने पवित्र हिंदू समाज का संरक्षण कर, उसकी सर्वांगीण उन्नति करना कार्यकर्ताओं का लक्ष्य है। इसके लिए आवश्यक है कि समाज के विभिन्न अंगों में जो अंतर है उसे दूर करें। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्ग की इसी आवश्यकता को समझकर सेवा कार्यों में स्वावलंबन एवं वैभव श्री आयाम प्रारंभ हुआ।
“संपूर्ण भारत में 980 सेवा संस्थाओं के माध्यम से चल रहे कार्य”उन्होंने बताया कि संपूर्ण भारत में 980 सेवा संस्थाओं के माध्यम से वनवासी, पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाले लोग घुमंतू एवं दिव्यांग बंधुओं के बीच अनेक सेवा कार्य चल रहे हैं जिनका मातृ संगठन सेवा भारती है।
“माताओं में सेवा भाव के साथ कुशल प्रबंधन का भी गुण रहता है। इस कारण माताएं सेवा कार्य अधिक अच्छा कर सकती हैं। समाज में सेवा की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीयों में सेवा का भाव हृदय में स्वतः उपजता है”
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक वर्षों में सेवा भारती का चिंतन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर था। वर्तमान में 35000 बाल संस्कार केंद्र एवं कोचिंग सेंटर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, परंतु व्यक्ति का अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण भी आवश्यक है। अतः उसकी आजीविका में भी सहयोग किया जाना सेवा भारती का लक्ष्य है।