
सूरत के एक परीक्षा केंद्र के बाहर हिंदू छात्रा को स्वामीनारायण कंठी (तुलसी माला) हटाने के लिए मजबूर किया गया। उसके पिता ने इस पर विरोध जताया और सुरक्षा जांच व अन्य धार्मिक प्रतीकों (जैसे हिजाब) के साथ परीक्षा देने की अनुमति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मैं सूरत में हूं, लाहौर में नहीं,” और सवाल किया कि जब दूसरे छात्र हिजाब पहनते हैं, तो माला को क्यों निशाना बनाया गया? वहीं, बाड़मेर के वीडियो में बुर्का पहनी छात्रा को पहचान के लिए केवल अपना चेहरा दिखाने के लिए कहा जा रहा है।
हिजाब के साथ परीक्षा, तो हिंदू प्रतीकों के साथ भेदभाव क्यों?सोशल मीडिया पर हिंदू छात्रों को कलावा, मंगलसूत्र, बिंदी, बाली, तिलक और तुलसी माला को हटाने के लिए मजबूर करने और हिजाब जैसी पोशाक को अनुमति देने पर भेदभाव व दोहरे मापदंड के आरोप लगाए जा रहे हैं। कई यूजर्स नियमों को एक समान मानदंड के रूप में देखने की मांग कर रहे हैं।
तुषार नाम के यूजर ने सूरत और बाड़मेर का वीडियो एक्स पर साझा करते हुए लिखा कि नीट परीक्षा के दौरान हिंदू छात्रा को अपने गले से तुलसी माला उतारने के लिए मजबूर किया गया, जबकि बाड़मेर में NEET एग्जाम के दौरान बुर्का पहने छात्रा की चेकिंग की गई, लेकिन उसे चेहरा दिखाने के बाद अंदर भेज दिया गया। यानी अगर आप हिंदू हैं, तो जो भी धागा पहनेंगे, उस तक की जांच की जाएगी। कमल मीणा ने वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आखिर कब थमेगा यह सिलसिला? हाथ से कलावा, गले से मंगलसूत्र। अगर हिजाब के साथ परीक्षा संभव है, तो हिंदू प्रतीकों के साथ यह भेदभाव क्यों? न्याय चाहिए।
एक अन्य यूजर ने घटना पर सवाल उठाते हुए लिखा, “मैं यह बार-बार पूछ रहा हूं.. ये नियम किसने बनाए हैं? लिखी हुई गाइडलाइंस कहां हैं? स्थानीय प्राधिकारी किस आधार पर तय करते हैं कि कौन सा मटीरियल अलाउड है और कौन सा नहीं? शिक्षा मंत्रालय ऐसी घटनाओं पर कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं दे रहा है और चेकिंग प्रोसेस की गहनता से जांच क्यों नहीं कर रही है?
Hindu candidate was forced to remove her Kanthi (Tulsi) mala during NEET exam in Surat, Gujarat
Candidate wearing burqa was checked during NEET exam but was still allowed to keep it on in Barmer, Rajasthan
If you are Hindu, any string you wear will be subjected to scrutiny pic.twitter.com/9XEDczh04V
— Tushar ॐ♫₹ (@Tushar_KN) May 3, 2026
आरव चौधरी लिखते हैं, “आज देश भर में नीट का एग्जाम था। ड्रेस कोड हाफ स्लीव, टी-शर्ट व अन्य कपड़े थे, लेकिन महजबी छात्रों को एनटीए विशेष छूट देता है? हिंदुओं के कलावे, बिंदी, कान की बलियां भी उतार लेता है। किसी भी परीक्षा में चेहरा और कान पूरे एग्जाम के दौरान खुले होने चाहिए। राजस्थान के बाड़मेर का वीडियो इसके उलट है।
बेंगलुरु में CET के दौरान ब्राह्मण छात्रों के जनेऊ उतरवाएहाल ही में बेंगलुरु के मडिवाला स्थित कृपानिधि कॉलेज में संयुक्त प्रवेश परीक्षा (CET) के दौरान पांच ब्राह्मण छात्रों के जनेऊ उतरवाने का मामला सामने आया था। छात्रों ने आरोप लगाया कि कॉलेज के परीक्षा कक्ष में मौजूद निरीक्षकों ने उनसे कहा कि यदि वे परीक्षा देना चाहते हैं, तो जनेऊ उतारें। बिना जनेऊ उतारे उन्हें परीक्षा कक्ष में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस मामले में माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी। इस घटना पर भाजपा के विरोध जताने के बाद संबंधित निरीक्षकों को निलंबित कर किया गया और तीन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था। कुछ अन्य छात्रों ने यह भी आरोप लगाया था कि निरीक्षकों ने उनकी कलाई पर बंधा लाल, पीला कलावा हटवा दिया और बाली तक उतरवा दी थी, जिससे वे सीईटी की परीक्षा ठीक से नहीं दे पाए।
बता दें कि नीट यूजी 2026 परीक्षा के लिए करीब 22 लाख छात्रों ने आवेदन किया है। यह परीक्षा मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है।